Ghansyam Sharma / Sat, Jul 2, 2022 / Post views : 158
कोंडागांव पत्रिका लुक।
मनोकामना दुर्गा मंदिर बनियागांव में प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम 4 जुलाई से 8 जुलाई तक होने के सम्बन्ध में आयोजित प्रेस वार्ता में गोपाल दीक्षित, दया शंकर दीवान, उमेष कोर्राम, कृश्णा दीवान, पुरुशोत्तम दीक्षित, विनय, बुधेष्वर कोर्राम ने जानकारी देते हुए बताया कि जिला व तहसील कोण्डागांव के अंतर्गत आने वाले और जिला मुख्यालय से रा.रा.30 पर स्थित ग्राम बनियागांव में वर्ष 1972 से माता दुर्गा की प्रमिता रखकर प्रतिवर्ष शारदेय नवरात्रि में विधि विधानपूर्वक पुजा अर्चना किया जाता रहा है,

जिस स्थान पर माता जी को शारदेय नवरात्रि में विराजित किया जाता है, उस स्थान में विगत 45 वर्षों से माता दुर्गा एवं भगवान शंकर की तैलचित्र की पुजा सुबह शाम प्रतिदिन की जाती है, उक्त स्थल पर लगातार पुजा अर्चना होते रहने से मां जगदम्बा की कृपा ग्रामवासियों पर बनी हुई है।

जो भी भक्त माता के चरणों में एक जोडी नारियल भेंटकर जो भी मनोकामना करता है, उसकी मनोकामना निश्चित तौर पर पूर्ण हुई है, यही कारण है कि धीरे-धीरे मां दुर्गा के उक्त स्वरूप का नाम ग्राम बनियागांव में मनोकामना दुर्गा देवी के नाम से प्रसिद्ध हो गया। इस वर्ष स्थापना का स्वर्ण जंयती वर्ष है तथा माता मनोकामना दुर्गा देवी का विशाल मंदिर बनकर तैयार हो गया है, जिसमें विधि विधान के साथ मनोकामना दुर्गा देवी की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम 4 से 8 जुलाई 2022 तक पांच दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम रखा गया है।

जिसकी तैयारी ग्रामवासी एवं निर्माण समिति के द्वारा जोर शोर से की जा रही है। 4 जुलाई सोमवार को वेदी पुजन एवं जलाधिवास, 5 जुलाई मंगलवार को वेदी पुजन एवं वस्त्राधिवास, 6 जुलाई बुधवार को वेदी पुजन एवं अन्नाधिवास, 7 जुलाई गुरूवार को वेदी पुजन द्रव्याधिवास, श्यनाधिवास एवं नगर भ्रमण तथा 8 जुलाई शुक्रवार को वेदी पुजन प्राण प्रतिष्ठा स्थापना, हवन एवं प्रसाद वितरण एवं भण्डारा का कार्यक्रम रखा गया है। उक्त सभी कार्यक्रम सुबह 9 बजे से प्रारंभ होंगे।

8 जुलाई की संध्या 7 बजे से प्रेमी शर्मा रायपुर की भजन मण्डली के द्वारा भजन प्रस्तुत किया जावेगा। उक्त विशाल मंदिर में मां मनोकामना दुर्गा देवी की मुरत के साथ साथ भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण, श्री राधाकृष्ण, दक्षिणमुखी हनुमान जी, बाबा भोलेनाथ एवं भैरव बाबा के मुर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होनी है। उक्त मंदिर का निर्माण शरद दीक्षित की देखरेख में संपन्न हुआ है। लोगों में चर्चा है कि इस क्षेत्र में इतना विशाल मंदिर और कहीं देखने में नहीं आया है।
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