Ghansyam Sharma / Sat, Feb 7, 2026 / Post views : 219
जगदलपुर। पत्रिका लुक
बस्तर पंडुम के शुभारंभ समारोह में शामिल होने पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बस्तर की माटी की सुगंध और आदिम जनजातीय परंपराओं पर आधारित भव्य प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न स्टॉलों का भ्रमण कर स्थानीय निवासियों और कारीगरों से प्रदर्शित कलाओं एवं उत्पादों की जानकारी ली।
राष्ट्रपति ने बस्तर पंडुम को आदिवासी विरासत के संरक्षण और उसे विश्व पटल तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बताया। प्रदर्शनी में ढोकरा हस्तशिल्प, टेराकोटा, वुड कार्विंग, सीसल कला, बांस कला, लौह शिल्प, जनजातीय वेश-भूषा एवं आभूषण, तुम्बा कला तथा बस्तर की जनजातीय चित्रकला को विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया।
ढोकरा कला में लॉस्ट वैक्स कास्टिंग तकनीक से निर्मित हस्तनिर्मित कलाकृतियां आकर्षण का केंद्र रहीं, जिनमें प्रकृति, देवी-देवताओं और ग्रामीण जीवन की झलक देखने को मिली। टेराकोटा और लकड़ी की नक्काशी में लोक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं का सजीव चित्रण किया गया।
जनजातीय आभूषणों के स्टॉल में चांदी, मोती, शंख एवं विभिन्न धातुओं से बने पारंपरिक आभूषण प्रदर्शित किए गए। वहीं जनजातीय वेशभूषा स्टॉल में दंडामी माढ़िया, अबूझमाड़िया, मुरिया, भतरा और हल्बा जनजातियों की पारंपरिक पोशाकें प्रस्तुत की गईं।
स्थानीय व्यंजन स्टॉल में जोंधरा, मंडिया पेज, आमट, चापड़ा चटनी, कुलथी दाल, तीखुर सहित पारंपरिक खाद्य पदार्थों का प्रदर्शन किया गया। राष्ट्रपति ने प्रदर्शनी की सराहना करते हुए इसे जनजातीय संस्कृति के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
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