Ghansyam Sharma / Tue, Feb 17, 2026 / Post views : 209
कोण्डागांव। पत्रिका लुक
जिले के अंदरुनी और दूरस्थ गांवों को बारहमासी पक्की सड़कों से जोड़ने के उद्देश्य से सड़क निर्माण कार्य किया जा रहा है, लेकिन इस विकास कार्य के दौरान पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचने के आरोप लग रहे हैं। सड़क निर्माण की आड़ में सैकड़ों पेड़ों की कटाई किए जाने से पर्यावरणीय संतुलन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
निर्माणाधीन सड़क की जद में आने वाले बड़ी संख्या में पेड़ों को काट दिया गया है, वहीं कई स्थानों पर पेड़ों को जड़ सहित उखाड़कर हटाया गया है। कटाई की जद में आए पेड़ों में साल, आम, बरगद सहित अन्य मिश्रित प्रजातियों के पेड़ शामिल हैं। सड़क किनारे जगह-जगह दिखाई दे रहे कटे हुए पेड़ों के ठूंठ इस बात की गवाही दे रहे हैं कि विकास कार्य के दौरान पर्यावरणीय पहलुओं की अनदेखी की जा रही है। 
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण क्षेत्र के विकास के लिए जरूरी है, लेकिन बिना पारदर्शी अनुमति प्रक्रिया और पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों के की जा रही पेड़ कटाई चिंता का विषय है। ग्रामीणों ने मांग की है कि नियमों के तहत अनुमति पत्र, काटे गए पेड़ों की संख्या और प्रतिपूरक वृक्षारोपण की जानकारी सार्वजनिक की जाए। 
पेड़ कटाई को लेकर क्या कहता है नियम
वन मंडलाधिकारी कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, वन क्षेत्र में सड़क निर्माण के लिए पेड़ कटाई की स्पष्ट गाइडलाइन निर्धारित है। यदि सड़क निर्माण से एक हेक्टेयर से कम वन क्षेत्र प्रभावित होता है तो अनुमति डीएफओ द्वारा दी जाती है।
पांच हेक्टेयर से कम क्षेत्र प्रभावित होने पर अनुमति राज्य शासन से तथा
पांच हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र आने की स्थिति में केंद्र सरकार से अनुमति लेना अनिवार्य होता है।
इन नियमों के बावजूद यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि जूनापानी से नेवता सड़क निर्माण के लिए कितने क्षेत्र में और किस स्तर से अनुमति ली गई है।
लोक निर्माण विभाग का पक्ष
इस संबंध में लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता (ईई) ए. आर. मरकाम ने बताया कि कोंडागांव जिला अंतर्गत ग्राम जूनापानी से नेवता तक सड़क निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग द्वारा ठेकेदार के माध्यम से कराया जा रहा है।
बरहाल, यह देखना होगा है कि संबंधित विभाग इस मामले में कब तक जांच कर जिम्मेदारों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करता है?
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