Ghansyam Sharma / Fri, Feb 20, 2026 / Post views : 340
कोण्डागांव। पत्रिका लुक
जिला अस्पताल कोंडागांव में पदस्थ हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. सिद्धार्थ पर ऑपरेशन के नाम पर मरीजों से कथित अवैध वसूली के गंभीर आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। मामला हड्डी रोग से जुड़े ऑपरेशनों का बताया जा रहा है, जहां मरीजों और उनके परिजनों का आरोप है कि सर्जरी से पहले उनसे हजारों रुपये मांगे जाते हैं।
ग्राम उरेला निवासी साहनी बाई ने बताया कि उनके पति के पैर के ऑपरेशन के लिए उनसे 6 हजार रुपये लिए गए। उनका आरोप है कि यह राशि अस्पताल परिसर के बाहर नगद ली गई। साहनी बाई का कहना है कि सरकारी अस्पताल होने के बावजूद उनसे पैसे मांगे गए, जबकि वे आर्थिक रूप से कमजोर हैं।
एक अन्य परिजन ने दावा किया है कि उनसे ऑपरेशन के लिए 12 हजार रुपये तक की मांग की गई। आरोप है कि लेन-देन जानबूझकर नगद किया जाता है और ऑनलाइन भुगतान से बचा जाता है, ताकि कोई रिकॉर्ड न रहे। कुछ मरीजों का कहना है कि उन्होंने डॉक्टर के साथ हुई बातचीत का ऑडियो रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखा है, जिसमें कथित रूप से पैसों की मांग का जिक्र है।
परिजनों का यह भी आरोप है कि यदि पैसे देने में देरी की जाए या इनकार किया जाए तो मरीज को डिस्चार्ज करने या वार्ड से बाहर करने की धमकी दी जाती है। इससे गरीब और आदिवासी क्षेत्र से आने वाले मरीजों पर मानसिक दबाव बनाया जाता है।
इसी बीच कुछ लोगों ने यह आरोप भी लगाए हैं कि डॉ. सिद्धार्थ सरकारी सेवा में रहते हुए कथित रूप से निजी अस्पताल या प्राइवेट क्लीनिक में भी प्रैक्टिस करते हैं। बताया जा रहा है कि जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों को निजी क्लीनिक या अस्पताल जाने के लिए प्रेरित किया जाता है, जहां उनसे मोटी रकम वसूली जाती है। नियमों के अनुसार, बिना अनुमति सरकारी चिकित्सकों द्वारा निजी प्रैक्टिस करना सेवा नियमों का उल्लंघन है।
नियम यह भी स्पष्ट करते हैं कि सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों से किसी भी प्रकार की व्यक्तिगत राशि लेना प्रतिबंधित है। उपचार का खर्च केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं, विशेषकर आयुष्मान भारत योजना के तहत वहन किया जाता है।
मामले पर अस्पताल प्रबंधन की ओर से मेडिकल ऑफिसर डॉ. पी. एल. मंडावी का कहना है कि अभी तक उन्हें इस संबंध में कोई लिखित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि शिकायत मिलने पर जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल आरोपों के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मरीजों और स्थानीय लोगों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा यदि आरोप सही पाए जाएं तो संबंधित डॉक्टर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि सरकारी अस्पतालों में आम जनता का भरोसा बना रह सके।
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