Ghansyam Sharma / Sat, Oct 25, 2025 / Post views : 199
रायपुर। पत्रिका लुक (भावेश जैन)
नवा रायपुर अटल नगर के आदिवासी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान परिसर में छत्तीसगढ़ के जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के विद्रोहों पर बन रहा स्मारक सह-संग्रहालय जल्द ही लोगों के लिए समर्पित किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्योत्सव के मौके पर देश के पहले डिजीटल संग्रहालय का लोकार्पण करेंगे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने निर्माणाधीन संग्रहालय का निरीक्षण कर तैयारियों का जायजा लिया और अधिकारियों को निर्देश दिए।
राज्य सरकार छत्तीसगढ़ स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने पर रजत जयंती मना रही है। शहीद वीर नारायण सिंह आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्मारक सह-संग्रहालय के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि आगंतुकों के लिए ऑडियो-वीडियो विजुअल की व्यवस्था हो ताकि वे सेनानियों के इतिहास से परिचित हो सकें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की परिकल्पना से यह संग्रहालय आदिवासी गौरव, शौर्य और बलिदान का प्रतीक बनेगा और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह जीवंत संग्रहालय लोगों में अन्याय और अत्याचार के खिलाफ विद्रोह का साहस जगाएगा। उन्होंने उद्घाटन के मद्देनजर सभी निर्माण कार्य समय पर पूर्ण करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान उन्होंने डिजिटलीकरण, पार्किंग, सॉवेनियर शॉप, गार्डनिंग और जलापूर्ति की स्थिति देखी। प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने बताया कि संग्रहालय में 14 गैलरियों सहित झंडा सत्याग्रह, जंगल सत्याग्रह और जनजातीय संस्कृतियों पर विशेष गैलरियां बनाई जा रही हैं।
निरीक्षण में वन मंत्री केदार कश्यप, मुख्य सचिव विकासशील, प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, सचिव राहुल भगत, कमिश्नर महादेव कावरे, आयुक्त डॉ. सारांश मित्तर, डॉ. रवि मित्तल, कलेक्टर गौरव सिंह और एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह उपस्थित थे।
वीएफएक्स और प्रोजेक्शन वर्क से सुसज्जित संग्रहालय
यह संग्रहालय वीएफएक्स तकनीक और प्रोजेक्शन वर्क से तैयार हो रहा है। आगंतुक स्टैच्यू के पास लगे डिजिटल बोर्ड और मोबाइल स्कैनर से प्रत्येक विद्रोह की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।
16 गैलरियों में सजी है वीर गाथाएं
संग्रहालय में हल्बा, सरगुजा, भोपालपट्टनम, परलकोट, तारापुर, लिंगागिरी, कोई, मेरिया, मुरिया, रानी चौरिस, भूमकाल, सोनाखान, झंडा सत्याग्रह और जंगल सत्याग्रह सहित कुल 16 गैलरियां बनाई गई हैं, जिनमें आदिवासी वीरों के संघर्ष और बलिदान का जीवंत प्रदर्शन होगा।
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