Ghansyam Sharma / Fri, Jan 23, 2026 / Post views : 250
केशकाल। पत्रिका लुक( (नरेंद्र सेठिया)
केशकाल विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बांसकोट में आस्था, परंपरा और सामाजिक न्याय की अद्भुत मिसाल मानी जाने वाली माटी कोर्ट की परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ निभाई जा रही है। गांव की मान्यता के अनुसार सात कुलों के सिरहा, पुजारी और ग्रामीण लगातार तीन दिनों तक रात में माटी कोर्ट परिसर में सोते हैं।
ग्रामीणों का विश्वास है कि इस अवधि के दौरान ग्राम देवी स्वप्न के माध्यम से दर्शन देकर संकेत और निर्देश देती हैं। देवी से प्राप्त संकेतों के आधार पर आगे की पूजा-विधि, गांव से जुड़े सामाजिक निर्णय तथा परंपरागत नियम तय किए जाते हैं।
इस परंपरा के तहत गांव में विराजमान सभी देवी-देवताओं और पूर्वजों का विधिवत पंजीयन किया जाता है। वहीं, सात कुलों की देवी-शक्तियों अथवा बाहरी शक्तियों द्वारा गांव में किए गए किसी भी गलत कार्य की माटी कोर्ट में सुनवाई होती है, जहां दोष सिद्ध होने पर परंपरागत दंड भी दिया जाता है।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से
दसरू राम मरकाम – शीतल पुजारी
सोनू मरकाम – माटी कोर्ट पुजारी
रोशन शार्दुल – मालगुजार ठाकुर व घाट मुड़ी पुजारी
ईश्वर नेताम – बालकुमार अंग पुजारी
चिंताराम शार्दुल – बड़े देव पुजारी
जय पांडे – हिंगलाजिन पुजारी
आत्माराम सिंह – ग्राम पटेल व घाट मुड़ी सिरहा
बुद्धू राम अटेंगा – करीम माता सिरहा
बिट्टू पांडे – हिंगलाजिन सिरहा
राजमान – ह्यूमन सेन सिरहा
सहित ईश्वर शार्दुल, नारायण शार्दुल, महिंद्रा मरकाम, रामकुमार, संजय शार्दुल एवं बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे।
ग्रामीणों का कहना है कि यह परंपरा न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ी है, बल्कि गांव में सामाजिक संतुलन, अनुशासन और सामूहिक निर्णय प्रक्रिया को मजबूत करने का भी माध्यम है, जिसे पीढ़ियों से निभाया जा रहा है।
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