Ghansyam Sharma / Tue, Dec 23, 2025 / Post views : 257
कोण्डागांव। पत्रिका लुक
बस्तर में अवैध लकड़ी कटाई और उसका परिवहन अब केवल अपराध नहीं, बल्कि एक संरक्षित कारोबार का रूप लेता जा रहा है। सवाल यह नहीं है कि तस्करी हो रही है या नहीं, बल्कि यह है कि तस्कर इतने निडर क्यों हैं? इसका जवाब साफ है—निगरानी तंत्र की कमजोरी और कार्रवाई करने की इच्छाशक्ति का अभाव।
यह विडंबना ही है कि जिन विभागों को जंगलों की रक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई है, वे कई मामलों में केवल फाइलों तक सीमित नजर आते हैं। शिकायतें होती हैं, सूचनाएं दी जाती हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं होती। ऐसे हालात में मीडिया को मजबूरन मैदान में उतरना पड़ रहा है, जो किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर और चिंताजनक संकेत है।
मीडिया का दायित्व पुलिसिंग करना नहीं, बल्कि सत्ता और व्यवस्था पर निगरानी रखना है। लेकिन जब जिम्मेदार विभाग आंखें मूंद लेते हैं, तब मीडिया को आगे आना पड़ता है। ऐसे में यह मांग पूरी तरह जायज है कि वन संपदा संरक्षण में योगदान देने वाले मीडिया कर्मियों को संरक्षण, सम्मान और प्रोत्साहन दिया जाए।
अन्यथा वह दिन दूर नहीं जब बस्तर की हरियाली केवल फाइलों और तस्वीरों तक सिमटकर रह जाएगी।
प्रेस क्लब अध्यक्ष ने उठाए गंभीर सवाल
प्रेस एंड मीडिया फेडरेशन एंड प्रेस क्लब कोण्डागांव के अध्यक्ष सुरेंद्र सोनपीपरे ने कहा कि दंतेवाड़ा से लेकर राजधानी रायपुर तक कई वनोपज और परिवहन चेक पोस्ट मौजूद हैं। इसके बावजूद अवैध रूप से लकड़ी का परिवहन होना विभागीय कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
उन्होंने कहा कि जब अवैध लकड़ी परिवहन की जानकारी मीडिया को मिल सकती है, तो फिर संबंधित विभागों को यह जानकारी क्यों नहीं मिल रही? और यदि जानकारी मिल भी रही है, तो फिर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही?
प्रेस क्लब अध्यक्ष ने इस पूरे मामले में विभागीय लापरवाही या संभावित मिलीभगत की आशंका भी जताई है और इसकी निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही मीडिया कर्मियों को ऐसे कार्यो के लिए वन संरक्षण, सम्मान औऱ प्रोत्साहन किया जाना चाहिए।
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