Ghansyam Sharma / Wed, Sep 16, 2026 / Post views : 63
कोण्डागांव। पत्रिका लुक
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी बस्तर संभाग परिषद के संयोजक तिलक पांडे ने यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाए जाने की चर्चा का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने इसे आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने वाला कदम बताते हुए केंद्र सरकार से प्रस्तावित शुल्क संबंधी किसी भी निर्णय को वापस लेने की मांग की है।
तिलक पांडे ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि केंद्र सरकार ने यूपीआई को देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए इसे आम जनता के लिए सरल, तेज और सुविधाजनक भुगतान व्यवस्था के रूप में बढ़ावा दिया। ऐसे में डिजिटल भुगतान व्यवस्था पर शुल्क लगाने को लेकर चर्चा करना जनता के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि यूपीआई ने छोटे दुकानदारों, मजदूरों, किसानों, विद्यार्थियों, महिलाओं और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए भुगतान व्यवस्था को आसान बनाया है।
उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार का शुल्क लागू होने पर इसका असर छोटे व्यापारियों और उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। छोटे दुकानदारों के सीमित लाभ पर प्रत्येक लेनदेन का शुल्क अतिरिक्त बोझ बन सकता है और इसकी भरपाई के लिए व्यापारियों द्वारा ग्राहकों से अधिक राशि लेने की स्थिति भी बन सकती है।
पांडे ने कहा कि महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक असमानता के बीच आम नागरिक पहले ही आर्थिक दबाव का सामना कर रहा है। ऐसे समय में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की चर्चा उचित नहीं है। उन्होंने मांग की कि यूपीआई को सार्वभौमिक, निःशुल्क और जनहितकारी भुगतान व्यवस्था के रूप में जारी रखा जाए।
उन्होंने यह भी मांग की कि शुल्क से जुड़े किसी भी निर्णय से पहले संसद, उपभोक्ता संगठनों, छोटे व्यापारियों और आम जनता से व्यापक चर्चा की जाए। पांडे ने चेतावनी दी कि यदि शुल्क लगाने का निर्णय वापस नहीं लिया गया तो सीपीआई आम जनता, छोटे व्यापारियों और उपभोक्ताओं को साथ लेकर लोकतांत्रिक आंदोलन करेगी।
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